केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा आज पेश किया गया केंद्रीय बजट 2026-27 एमएसएमई सेक्टर और मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है, लेकिन फर्नीचर और फर्निशिंग जैसे सेक्टर्स की विशिष्ट चुनौतियों को पूरी तरह संबोधित नहीं करता। हम व्यापार मंडल की ओर से इस बजट का आंशिक स्वागत करते हैं, क्योंकि इसमें कुछ राहतें हैं जो व्यापारियों की कैश फ्लो और ग्रोथ में मदद कर सकती हैं। हालांकि, कई अपेक्षाएं अधर में लटकी रह गईं, जो छोटे व्यापारियों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरीं। हर व्यापारी बजट से यह उम्मीद करता है कि रियायतें मिलेंगी, लागत कम होगी और व्यापार दुगुनी रफ्तार से आगे बढ़ेगा, लेकिन इस बार कुछ क्षेत्रों में कमी महसूस हुई। हम सरकार से अपील करते हैं कि क्रियान्वयन में इन कमियों को दूर किया जाए, अन्यथा एमएसएमई सेक्टर की चुनौतियां और बढ़ सकती हैं – यह एक चेतावनी है कि बिना और राहत के, आयात प्रतिस्पर्धा और बढ़ती लागत से छोटे व्यापारी पिछड़ सकते हैं।
फर्नीचर और फर्निशिंग व्यापार पर प्रभाव: बजट में फर्नीचर उद्योग के लिए कोई सीधा बड़ा पैकेज या स्पेसिफिक राहत नहीं घोषित हुई, जो एक बड़ी कमी है। अपेक्षा थी कि आयात पर ड्यूटी बढ़ाकर या जीएसटी रेट्स कम करके (वर्तमान 18% से) घरेलू उत्पादकों को संरक्षण मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हालांकि, एमएसएमई सपोर्ट के तहत ₹10,000 करोड़ का एसएमई ग्रोथ फंड और क्रेडिट गारंटी कवर को बढ़ाना (₹5 करोड़ से ₹10 करोड़ तक) फर्नीचर मैन्युफैक्चरर्स के लिए फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि हमारी इंडस्ट्री मुख्य रूप से एमएसएमई पर आधारित है। TReDS प्लेटफॉर्म को मैंडेटरी बनाना और GeM से लिंक करना तेज पेमेंट्स सुनिश्चित करेगा, जो कैश फ्लो में सुधार लाएगा। मेक इन इंडिया पुश और अफोर्डेबल हाउसिंग पर इंसेंटिव्स से डिमांड बढ़ सकती है, लेकिन जीएसटी में कोई कमी न होने से लागत पहले जैसी ही रहेगी। कुल मिलाकर, स्थिति पहले से थोड़ी बेहतर है, लेकिन नुकसान यह है कि बड़े बदलाव न होने से आयातित फर्नीचर से प्रतिस्पर्धा बनी रहेगी। हम सरकार को चेताते हैं कि बिना स्पेसिफिक जीएसटी रिलीफ के, छोटे फर्नीचर व्यापारी मार्जिन पर दबाव महसूस करेंगे।
सामान्य व्यापारियों पर प्रभाव: सभी व्यापारियों के लिए बजट एमएसएमई-केंद्रित है, लेकिन अपेक्षाओं से कम। ₹10,000 करोड़ का एसएमई ग्रोथ फंड और सेल्फ-रिलायंट इंडिया फंड में ₹2,000-4,000 करोड़ का टॉप-अप क्रेडिट एक्सेस को बेहतर बनाएगा, जो छोटे ट्रेडर्स के लिए फायदेमंद है। एक्सपोर्ट प्रमोशन के लिए ईसीजीसी सपोर्ट और ड्यूटी रेमिशन स्कीम्स से वैश्विक बाजार में मदद मिलेगी, खासकर यूएस टैरिफ्स से प्रभावित सेक्टर्स को। हालांकि, सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) में बढ़ोतरी (F&O पर 0.05% तक) से ट्रेडर्स को शॉर्ट-टर्म नुकसान होगा, और बाजार में गिरावट आई है। इंफ्रा कैपेक्स को ₹12.2 लाख करोड़ तक बढ़ाना लॉजिस्टिक्स में सुधार लाएगा, लेकिन बड़े रिफॉर्म्स की कमी से व्यापार दुगुना बढ़ने की उम्मीद कम लगती है। हम चेताते हैं कि बिना और क्रेडिट गारंटी बढ़ाए और कंप्लायंस आसान बनाए, एमएसएमई सेक्टर पिछड़ सकता है।
इनकम टैक्स और अन्य टैक्स में बदलाव: इनकम टैक्स स्लैब्स में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं, लेकिन न्यू टैक्स रिजीम में ₹12 लाख तक कोई टैक्स नहीं और स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹75,000 तक बढ़ाना मध्यम वर्ग के व्यापारियों के लिए थोड़ी राहत है। कॉर्पोरेट टैक्स रिलीफ छोटे टर्नओवर (< ₹50 करोड़) वालों के लिए है, जो फायदेमंद है। जीएसटी सिंप्लिफिकेशन और फास्टर रिफंड्स से अनुपालन आसान होगा, लेकिन रेट्स में कमी न होने से कोई बड़ा फायदा नहीं। इनकम टैक्स मिसरिपोर्टिंग पर पेनल्टी बढ़ने से सावधानी जरूरी है। कुल मिलाकर, टैक्स में बोझ नहीं बढ़ा, लेकिन अपेक्षित रियायतें कम हैं – यह चेतावनी है कि बिना और टैक्स रिलीफ के, छोटे व्यापारियों का मुनाफा दबाव में रहेगा।
ओवरऑल प्रतिक्रिया: यह बजट ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में है, लेकिन क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। एमएसएमई और मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस से रोजगार बढ़ सकता है, लेकिन फर्नीचर जैसे सेक्टर्स में स्पेसिफिक रियायतों की कमी से दुगुनी तरक्की मुश्किल लगती है। हम सरकार से अपील करते हैं कि जीएसटी रेट्स कम करें, आयात कर्ब्स सख्त करें और बड़ा पैकेज दें, अन्यथा व्यापारी निराश होंगे। फिर भी, सरकार की इच्छा के अनुसार हम इस बजट का समर्थन करते हैं और हम उम्मीद करते हैं कि कमियां दूर होंगी।
बजट 2026-27: समर्थन तो मिला, पर फर्नीचर व छोटे व्यापारियों की चुनौतियाँ बरकरार
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