तनावमुक्त जीवन के लिए साधना और स्वभावदोष निर्मूलन अनिवार्य – सद्गुरु नीलेश सिंगबाळ
चंदौली वर्त्तमान में बढती प्रतिस्पर्धा तथा बाजार में होनेवाले उतार-चढाव, भविष्य की अनिश्चतता इत्यादि के कारण व्यापार जगत तनाव में हैं । वास्तव में तनाव बाहर की परिस्थितियों से अधिक हमारे मन की स्थिति के कारण होता है । तनाव के कारण विविध प्रकार के शारीरिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक कष्ट भी होते हैं । तनाव पर मात कैसे किया जाए, यह न जानने के कारण समाज में व्यसन, अपराध, आत्महत्या इत्यादि घटनाएं बढती ही जा रही हैं । यदि हम साधना के माध्यम से अपने मन को सशक्त बनाएं और अपने स्वभावदोषों को दूर करें, तो अत्यंत कठिन परिस्थितियों में भी हम आनंदमय जीवन जी सकते हैं, ऐसे वक्तव्य सद्गुरु निलेश सिंगबाळ जी ने व्यक्त किए । वे रामनगर औद्योगिक एसोसिएशन स्थित ‘प्रशासनिक भवन एसोसिएशन सभागार’ में मार्गदर्शन कर रहे थे। इस समय देव भट्टाचार्य, अजय राय, अमित गुप्ता, अरविंद सिंह, सुरेश खंडेलवाल, जितेंद्र जैन, संजय लखमानी, राकेश जायसवाल, शिवपूजन जायसवाल, मनोज तिवारी, अवधेश जायसवाल, त्रिभुवन सिंह एवं अन्य उपस्थित थे ।
अंत में कार्यक्रम के निवेदक और रामनगर औद्योगिक एसोसिएशन के अध्यक्ष देव भट्टाचार्य ने कार्यक्रम तथा सनातन संस्था की सराहना करते हुए कहा कि उद्योग जगत में अत्यधिक तनाव है और आज के मार्गदर्शन से तनाव का कारण और उसपर बताए गए उपाय से हम सभी को दिशा मिली ।

