वाराणसी=प्रेमचंद हिंदी कथा-साहित्य के ऐसे यथार्थवादी लेखक हैं जिन्होंने समाज की रूढ़ियों, स्त्री-पीड़ा, नैतिक दुविधाओं और मध्यवर्गीय जीवन की विडंबनाओं को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ चित्रित किया। उनकी कहानी ‘नया विवाह’ स्त्री-जीवन, विवाह संस्था और पुरुषसत्तात्मक मानसिकता की गहरी परतों को उजागर करने वाली एक मार्मिक कथा है। उक्त कथन प्रोफेसर श्रद्धानंद ने उपन्यास सम्राट प्रेमचंद जी की जन्मस्थली ( स्मारक) लमही में प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र ट्रस्ट लमही, वाराणसी द्वारा आयोजित सुनो मैं प्रेमचंद कार्यक्रम को 1812 दिवस पर प्रेमचंद की कहानी नया विवाह का पाठन डा नसीमा निशा ने किया इनका सम्मान ट्रस्ट के संरक्षक प्रो श्रद्धानंद, निदेशक राजीव गोंड, आनंद कृष्ण माशुम, रामजतन पाल ने किया। ने किया । आनंद कृष्ण मालूम ने कहा कि ‘नया विवाह’ में प्रेमचंद विवाह को केवल सामाजिक अनुबंध नहीं, बल्कि मानसिक और नैतिक जिम्मेदारी के रूप में प्रस्तुत करते हैं। कहानी यह प्रश्न उठाती है कि क्या विवाह केवल पुरुष की सुविधा के लिए है? क्या स्त्री को हर स्थिति में समायोजन ही करना होगा? । रामजतन पाल ने कहा कि कहानी का पुरुष पात्र संवेदनशील प्रतीत होते हुए भी भीतर से स्वार्थी और अहंकारी है। वह स्त्री को व्यक्ति नहीं, भूमिका के रूप में देखता है। प्रेमचंद इस मानसिकता की बिना किसी उपदेश के तीखी आलोचना करते हैं। कार्यक्रम में मुख्य रूप से रोहित गुप्ता, सीमा अस्थाना, अश्विवित दूबे, नमन श्रीवास्तव, सुरेस चंद्र दूबे, अरविंद विश्वकर्मा, प्रांजल श्रीवास्तव, वाचस्पति चतुर्वेदी, अशोक पाण्डेय, शंकर श्रीवास्तव, यश वर्मा , अभिषेक मौर्य, सूर्यदीप कुशवाहा, राहुल यादव, रोहित गुप्ता, विपनेश सिंह, संजय श्रीवास्तव, एवं छात्र, साहित्यप्रेमी, और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन आयुषी दूबे ने किया, सभी का स्वागत व धन्यवाद ज्ञापन रोहित गुप्ता ने किया।
समाज की रूढ़ियों, स्त्री पीड़ा को दर्शाती है मुंशी प्रेमचंद की कहानी नया विवाह=प्रो,श्रद्धानंद
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